कभी- कभी
April 11, 2007 by ranjana
ज़िंदगी में वाक़िफ़ हूँ तेरे अंदाज़ से
पैर तू भी अपना ख़ास अंदाज़ दिखा जाती है
है दिल में कोई गुबार दर्द का भरा हुआ
अब यह हाल उनको भी तो सुनाए कभी- कभी
दिल तड़पता है हैर लम्हा उनकी ही याद में मेरा
अब बस उनसे नज़रे यूँ ही मिल जाए कभी- कभी
सेहर होते ही बुझ जाना है शमा को
दिलो का एह तूफ़ान भी तो थम जाए कभी- कभी
वोह आए या ना आए कोई यह ना मुझे बताए
इस उमीड के दीपक को यूँ ही जला के रख़ना है कभी -कभी

