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Archive for April, 2007

यह जीवन का सत्य है की हम अक्सर छोटी छोटी बातो के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण चीज़ो का सत्यनाश करते हैं .कुछ छोटे पल जो अक्सर दिली ख़ुशी दे के जाते हैं ..हम यूँ ही बेकार के लालच में गवां देते हैं …..कुछ उदारहण के माध्यम से इन बातो को आसानी से समझा जा सकता है [...]

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हम कितने सभ्य हो गये हैं ..आज हमे आज़ाद हुए कितने बरस बीत गये हैं और हमारे सभ्यता के कारनामो से तो आज के पेपर भरे रहते हैं नमूना देखिए बस में बाज़ार में किसी की जेब कट गयी है मामूली बात पर कहसुनी हो गयी .सड़क दुर्घटना का कोई शिकार हो गया जिसे तुरंत [...]

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वादा ए वफ़ा का निभौं कैसे,
चाँद हूँ में तो दिन में नज़र आऊ कैसे
आँखो में बिखरा हुआ कोई पिछले पहर का ख्वाब हूँ मैं
पुकारे भी कोई तो अब इन आँखो में समाऊ कैसे
भरा है दिल की गहराई में जैसे कोई दर्द तनः सा सफ़र
अब तू ही बता दे की वेआरणो में [...]

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ज़िंदगी में वाक़िफ़ हूँ तेरे अंदाज़ से
पैर तू भी अपना ख़ास अंदाज़ दिखा जाती है
है दिल में कोई गुबार दर्द का भरा हुआ
अब यह हाल उनको भी तो सुनाए कभी- कभी
दिल तड़पता है हैर लम्हा उनकी ही याद में मेरा
अब बस उनसे नज़रे यूँ ही मिल जाए कभी- कभी
सेहर होते ही बुझ जाना [...]

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