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Edit मत सुना करो……….. ishq. romance
मत सुना करो………..

shq[Photo]

प्यार में बस नाम और जगह बदल जाती है
सबके हिस्से वही आँसू वही तन्हाई ही आती है

जब चदता है इश्क़ का जनून किसी के सिर पर
तो फिर दुनिया उसको रंगीन नज़र आती है

पा जाते है सिर्फ़ चंद लोग जब अपनी मंज़िल
तो राहे वफ़ा की रोनक कुछ और बढ़ जाती है

मत सुना करो रातो को तुम इश्क़ के किस्से किसी से
सुना है की इनको सुनने से रातो की नींद उड़ जाती है !!

मेरा नाम वो अक्सर लिखा करता है अपने गीतो में
मेरे लिए उसको अपनी हाथो की लकीरों को बदलना होगा

पढता है वो मेरा लिखा हुआ इबादत की तरह
“क्या हूँ मैं उसकी” यह खुदा से पूछना होगा

मैं उसके जनून की तलाश हूँ शायद इस जन्म में
मेरे लिए उसको अपनी किस्मत से लड़ना होगा

करते नही है हम उम्र का हिसाब सच्ची दोस्ती में
ऐसी दोस्ती के लिए उमर का हर फ़ासला काम करना होगा

यह सुन के क्या कहेगा जमाना मुझे इसकी ख़बर नही
उस दिवाने के लिए मुझे अपना नाम अब बदलना होगा

खता है उसके दिल की या मेरी किस बात पर उसको आता है प्यार
यह बात है क्या अब मुझे अपने दिल से यह पूछना होगा

मेरी खातिर वो माँगता है खुदा से ना जाने कितनी दुआएं
मुझे उसकी दोस्ती के लिए खुदा से शुक्रिया कहना होगा

उसके दिल में हैं मेरे लिए इतने हसीन जज्बात………..
यह जान कर मुझे अपने दिल के कोने मैं हमेशा उसको रखना होगा!!

रंजना भाटिया45237943.jpg

दादी माँ के खज़ाने से …..

हिंदी में कई विशाए पैर ब्लॉग पैर पैर फ़ेशन और सुंदरता पैर कोई ब्लॉग नही है
मैं दादी माँ के काज़ाने से कुछ चुरा के लाई हूँ देखते हैं यह हम सब के कितने काम का है
सुंदर कौन नही दिखाना चाहता …और घर में पड़ी चीज़े काम आ जाए तो सोने पैर सुहागा

1. यदि आपकी तवचा धूप से जल गयी है तोह टमाटर और खीरे का रस मिला के 10 से 15 मिनुटे तक लगा ले
आराम मिलेगा ….

2.इंस्टेंट चीज़ो का ज़माना है ….पर्टय में जाना है और चेहरा मुरझाया हुआ है ? कोई फ़िक्र की बात नही
देखिए नींबू और शहद होंगे घर में दोनो को एक एक चम्मच मिक्स करे और लगा ले ..15 मिनट के बाद गुनगुने पानी से धो ले ..फ़र्क देखने वाले देखते रह जाएँगे

3. इस तरह आप घर में यैड केला है तो उस को भी शहद में मिला कर लगा सकती है सूखे दूध के पॉडर के साथ
15 मिनट लगा के गुनगुने पानी से धो दे

4. तरबूज को मेश करे उसके रस को लगा ले …यह सारी गंदगी को साफ़ कर देता है और आपका चेहएरा चमकने लगता है

5.यदि आपकी तवचा सुखी है तो एक दिन पुराना दही ले और टमाटर का रस मिला ले लगा ले …झुरियों की समस्या सा आसान उपाय है यह !!

आप यह सब करे ..तब तक मैं कुछ और चुरा के लाती हूँ :)

यह जीवन का सत्य है की हम अक्सर छोटी छोटी बातो के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण चीज़ो का सत्यनाश करते हैं .कुछ छोटे पल जो अक्सर दिली ख़ुशी दे के जाते हैं ..हम यूँ ही बेकार के लालच में गवां देते हैं …..कुछ उदारहण के माध्यम से इन बातो को आसानी से समझा जा सकता है …

किसी गावं में एक बहुत ही स्मरिद्ध परिवार रहता था ..उस परिवार में दो बेटे थे ..अचानक एक दिन घर के मुखिया यानी की बाप का सवर्गवास हो गया ..अब बात आई बँटवारे की ….महीनो बीत गये पर बँटवारे की लिस्ट ना बन पाई …जिस पर दोनो भाई सहमत होते …”"यह माँ के गले का हार तू कैसे लेगा …यह तो माँ की हार्दिक इच्छा मेरी पत्नी को देने की थीई ..तुम दोनो से तो कभी उसकी बनी ही नही .,..या …वह सबसे उपर का कमरा मैं तुझे कैसे दे डू ? मैं क्या नीचे वाले कमरे में घुट के मार जउं ..आदि आदि ..असी कई बातो पर रोज़ बेहास होती और कोई फैलसा ना हो पाता ….अंत में पाँचो के पासस जाने का फ़ेसला किया गया..की वोह जो कह देंगे वही माना जाएगा …पाँचो ने जब यह सब सुना तो कहा की हम यहाँ पर पाँच ताले लगा रहे हैं ..फ़ैसला कल होगा ..सुन के दोनो भाइयों ने भी अपने दो ताले और लगा दिए …अब दोनो भाई निश्चिंत हो गये की अब कोई अंदेर नही जा पाएगा और कल तोह फ़ैसला हो ही जाएगा …..पर रात को जो चुपके से घरो में घुसते हैं वोह भी इसी समाज़ के सदस्य हैं …उनको भी तो अपना पेट भरना है ..और वोह तो कभी सीधे दरवाज़े से अंदर जाते ही नही ..यानी की चोर महराज़ जी …सो वह पिछले दरवाज़े से घुसे और सारा घर साफ़ …..अब सूबेह जब पाँचो ने और दोनो भाईयों ने खुअला दरवाज़ा और सब सामान साफ़ देखा तोह हेरान परेशान …पाँचो ने कहा अब ख़ाली कमरे हैं उन्ही को बाँट लो आपस में ..अब बडा भाई बोला की मुझे तोह मुँबई में नोकरी मिल गयी है मैं तो वहीं जा रहा हौन …छोटे तुम्ही अब इन को सँभालो …छोटा भाई बोला की आपके बगेर में अकेला क्या करूँगा ..आप शहर में धक्के खाए और में यहाँ आराम से राहू .मुझे तोह नर्क में भी जगह नही मिलेगी …..यह कह दोनो भाई एक दूसरे से लिपट गये …पाँच हेराँ की यही पहले कर लेते तो इतना नुक़सान ना होता ….इस तरह से कई छोटी बातो को ले कर बड़ी चीज़ो का नुक़सान कर दिया जाता है …..

फ़ोर्ड मोटर कम्पनी के मालिक एक मामूली सा इंसान था ..अपनी मेहनत से वोह संसार का सबसे धन पति आदमी बना …सारा जीवन उसने उसी धन को कामने में लगा दिया …दुनिया की नज़र में वो सबसे सुखी आदमी माना जाता .पर जब एक दिन किसी ने उस से पूछा की आप तो बहुत सुखी होंगे ..आपके जीवन में किसी चीज़ का अभाव ही नही है ….तब फ़ोर्ड ने दुखी हो कर कहा की धन के अलावा मेरे पास सब अभाव ही अभाव है ….मैने सिर्फ़ धन कामाया ..पर कोई अच्छा दोस्त नही बना पाया ..अब यदि कोई बने तो वोह सच दोस्त नही होगा ….अब मेरा बुढ़ापा…बिना आची मित्रो के सूना है .आस पास सिर्फ़ अब ख़ुशमदी लोग ही इख़्हट्ठे किए जा सकते हैं सचे दोस्त नही ,,मैं इतना धन कमा के भी अकेला ही रह गया …मैं धन के पिच्छे अपने जीवन के सुख के पल खो बेता ..और अब सब कुछ होते हुए भी अकेला ही हूँ …फिर वही की छोटी बातो के आगे . जीवन के अच्छा वक़्त यूँ ही गवां दिया …

दुर्योधन ने पाँच गाँव नही दिए पर अपना पूरा साम्राज्या ,पूरा वंश ,और अपना जीवन दे दिया …..कुमति के कारण हम छोटी छोटी बातो को ख़ुशियों को यूँ ही जाने देते है झूठी त्रिष्णा के पिच्छे भाग कर अपने जीवन के कई सूखो को खो बेत्ततें हैं …ज़िन्दगी बहुत छोटी है में ज्यादा से ज्यादा खुशियाँ बटोर के किसी को बिना दुख पहुँचाए .हम अपना जीवन जी ले यही ज़िंदगी जीना सही अर्थो में कहलाएगा !!
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हम कितने सभ्य हो गये हैं ..आज हमे आज़ाद हुए कितने बरस बीत गये हैं और हमारे सभ्यता के कारनामो से तो आज के पेपर भरे रहते हैं नमूना देखिए बस में बाज़ार में किसी की जेब कट गयी है मामूली बात पर कहसुनी हो गयी .सड़क दुर्घटना का कोई शिकार हो गया जिसे तुरंत हस्पिटल पहूचाना है पर हम लोग देखा अनदेखा कर के निकल जाते हैं .क्या करे कैसे करें दफ़्तर के लिए देर हो रही है ..कौन पुलिसे के चक्कर में पड़े आदि आदि ..यही सोचते हुए हम वहाँ से आँख चुरा के भाग जाते हैं ..सच में कितने सभ्य हो गये हैं ना हम

हमारा जीवन दर्शन बदल चुका है वह भी उस देश में जहाँ पड़ोसी की इज़्ज़त हमारी इज़्ज़त गावं की बेटी अपनी बेटी .अतिथि देवा भावा ,सदा जीवन उच्च विचार .रूखा सूखा चाहे जो भी खाओ मिल बाँट के खाओ ………..जैसे हाँरे जीवन दर्शन के अंग रहे हैं ..आज आपके पड़ोसी के साथ कुछ भी हो जाए पर आपको पता ही नही चलता है ..सबको अपनी अपनी पड़ी है यहाँ आज कल ..कोई किसी मुसीबत में पड़ना ही नही चाहता है छाए उस वयक्ति को अपने जीवन से हाथ धोने पड़े ..पर हम तोह सभ्य लोग हैं क्यूं सोचे किसी के बारे में ..???

काश की हम अपनी उस पुआरनी जीवन दर्शन को फिर से वापस ला पाते और सच में सभ्य कहलाते ..अभी भी समाए नही बीता है यदि समाज़ के कुछ लोग भी अपने साथ रहने वालो के बारे में सोचे तोह शायद बाक़ी बचे लोगो की विचारधारा यह देख के कुछ तो बदलेगी ..सिर्फ़ ज़रूरत है कुछ साहसी लोगो के आने की आगे बढ़ के पहल करने की ..अपनी सोई आत्मा को जगाने की ..तब यह वक़्त बदलेगा तब हम सचमुच में ही सभ्य कहलाएँगे !!
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hum kitne sbhye ho gaye hain ..aaj hame aazaad hue kitne baras beet gaye hain aur hamaare sabhyata ke kaarnaamo se to aaj ke pepar bhare rahate hain namuna dekhiye bas mein bazaar mein kisi ki jeb kat gayi hai mamuli baat par kahasuni ho gayi .sadak durghatana ka koi shikaar ho gaya jise turant haspital pahuchaana hai par hum log dekha andekha kar ke nikal jaate hain .kya kare kaise karen daftar ke liye der ho rahi hai ..kaun pulice ke chakkar mein pade aadi aadi ..yahi sochte hue hum wahan se aankh chura ke bhaag jaate hain ..sach mein kitne sbhye ho gaye hain na hum

hamara jeevan darshan badal chuka hai! wah bhi us desh mein jahaan padosi ki ijjat hamaari ijjat gaawn ki beti apni beti .atithi deva bhava ,sada jeevan uchh vichaar .rukha sukha chahe jo bhi khaao mil baant ke khaao ………..jaise vakaya haamre jeevan darshan ke ang rahe hain ..aaj aapke padosi ke saath kuch bhi ho jaaye par aapko pata hi nahi chalata hai ..sabko apni apni padi hai yahan aaj kal ..koi kisi musibat mein padna hi nahi chahata hai chaye us vayakti ko apne jeevan se haath dhone pade ..par hum toh sabhye log hain kyun soche kisi ke baare mein ..???

kash ki ham apni us puaarni jeevan darshan ko fir se wapas la paate aur sach mein sabhye kahlaate ..abhi bhi samaye nahi beeta hai yadi samaz ke kuch log bhi apne saath rahne waalo ke baare mein soche toh shayad baaki bache logo ki vichardhara yah dekh ke kuch to badlegi ..sirf jarurat hai kuch sahasi logo ke aane ki age badh ke pahal karne ki ..apni soyi atma ko jagaane ki ..tab yah waqt badlega tab hum sachmuch mein hi sabhye kahlaayenge !!

First One

वादा ए वफ़ा का निभौं कैसे,
चाँद हूँ में तो दिन में नज़र आऊ कैसे

आँखो में बिखरा हुआ कोई पिछले पहर का ख्वाब हूँ मैं
पुकारे भी कोई तो अब इन आँखो में समाऊ कैसे

भरा है दिल की गहराई में जैसे कोई दर्द तनः सा सफ़र
अब तू ही बता दे की वेआरणो में अपनी महफ़ील साजऊ कैसे

जो देखती हैं निगाहे वोह ही तो सच नही होता सब
एह एतिहायात भी ज़रूरी है दिल की बात नज़रो से छलकाऊ कैसे

ग़ज़लों में आ रहे हैं आल्फ़ाज़ आज दर्द के,
अब तू ही बता दे की दिल को में बहलऊ कैसे!!

कभी- कभी

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ज़िंदगी में वाक़िफ़ हूँ तेरे अंदाज़ से
पैर तू भी अपना ख़ास अंदाज़ दिखा जाती है

है दिल में कोई गुबार दर्द का भरा हुआ
अब यह हाल उनको भी तो सुनाए कभी- कभी

दिल तड़पता है हैर लम्हा उनकी ही याद में मेरा
अब बस उनसे नज़रे यूँ ही मिल जाए कभी- कभी

सेहर होते ही बुझ जाना है शमा को
दिलो का एह तूफ़ान भी तो थम जाए कभी- कभी

वोह आए या ना आए कोई यह ना मुझे बताए
इस उमीड के दीपक को यूँ ही जला के रख़ना है कभी -कभी

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dharti hun mein teri, mere akaash ho tum……
sirf ek mirgtrishna nahi , meri sachaaye ka abhaas ho tum…
apni kai adhjagi raato mein,
sapna ban ke utarte dekha hai tumhe,
paya hai teri ungaliyon ki shararat ko ,
apni dharkano mein,apni muskarhato mein…..
aur paya hai tujhe kabhi anpni karwato ki sarsrahat mein,
kabhi apni unkahi baato ko sunaane ke liye jagaya hai tumhe……
apni en band palako mein ek kahaani ki treah chipaaya hai tumhe……
per har baar khulti se neend mein paya hai……….
tumhare pyar ka …………………………………..
tumhari khushbu ka………………………………
apne astitive per tumhara hi pura adhikaar…………..